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क्या आपके लिए स्विंग ट्रेडिंग सही है?

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Volatile stocks for nse| Best liquid stocks kaise search kare

अगर आप एक ट्रेडर है और अपने stocks के बारे में रिसर्च करते रहते हैं तब आपने ट्रेडिंग से संबंधित एक शब्द जरूर सुना होगा इसको लिक्विड स्टॉक Liquid stocks और दूसरा शब्द आपने सुना होगा Volatile stocks

आखिर इनको लिक्विड Liquid stocks क्यों बोलते हैं, क्या इनमे बहुत ही ज्यादा तरलता होती है इस वजह से इनको लिक्विड स्टॉक बोला जाता है, या फिर कोई और कारण है.

आपकी जानकारी के लिए बता देते हैं कि लिक्विड स्टॉक्स में बहुत ही ज्यादा तरलता होती है और इसमें काफी अच्छी volality होती है

What is the meaning of Liquidity stocks in stock market hindi

शेयर बाजार में लिक्विडिटी से यह मतलब होता है कि ऐसे प्रकार के एसेट में चाहे वह स्टॉक हो या फिर कोई बॉन्ड या कोई और कमोडिटी उसको कितनी जल्दी खरीदा और बेचा जा सकता है ताकि उसको जल्दी से नकदी Cash में बदला जा सके

अगर हम इसको सरल शब्दों में बात करें कि लिक्विड स्टॉक में बहुत ही ज्यादा खरीद और बिक्री होती है, और ऐसे स्टॉक बहुत ही ज्यादा ऊपर नीचे करते हैं.

जैसे इसको अगर हम एक उदाहरण से मान लेते हैं . श्वेता ने एक स्टॉक को 800 रुपए पर खरीदा और उसको 30 मिनट के अंदर 810 रुपए पर बेच दिया.

तब इस तरह का स्टॉक लिक्विड स्टॉक माना जाएगा क्योंकि इसमें प्राइस का मूवमेंट काफी तेजी से हो रहा होता है. अब आपको समझ में आ गया होगा कि जिस स्टॉक्स में प्राइस का मोमेंट बहुत तेजी से होता है ऐसे स्टॉप लिक्विड स्टॉक कहलाते हैं.

Volatility meaning in trading | volality ka kya matlab hota hai

Volality एक प्रकार का Rate जिससे किसी भी स्टॉक सिक्योरिटी की कीमत बढ़ जाती है या घट जाती है. इस तरह के उतार-चढ़ाव को स्थिरता नहीं रह पाती है तब ऐसे स्टॉक वोलेटाइल स्टॉक्स बोला जाता है.

अगर किसी स्टोक्स में बहुत तेजी से कोई प्राइस अचानक से ऊपर बढ़ जाता है और अचानक से नीचे गिर पड़ता है तब ऐसे स्टॉक स्थिर नहीं रहता है

और इस तरह के स्टॉक को वोलेटाइल स्टॉक्स बोलते हैं.

अगर किसी स्टॉक में धीरे-धीरे प्राइस बदलता है तब ऐसा स्टॉक कम वोलेटाइल स्टॉक्स कहलाता है.

बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव को मापने के लिए India Vix Index का सहारा लिया जाता है.

India vix indicator यह एक तरह का इंडिकेटर है जो यह बताता है कि मार्केट में कितनी ज्यादा uncertanity फैली हुई है.

India Vix range normal 12 to 16

अगर इंडिया विक्स रेंज 18 से ऊपर निकल जाती है तब यह माना जाता है कि बाजार में एक डर का माहौल पैदा हो रहा है इसलिए इसको कम करने के लिए कोशिश की जाती है.

लिक्विडिटी और volality क्या अंतर है दोनों में| Diffrence liquidity and volality

Volality कई तरह के कारण पर निर्भर है जैसे मार्केट में खरीददार क्या डर के माहौल में खरीद रहे हैं या क्या आपके लिए स्विंग ट्रेडिंग सही है? जब भी वह खरीद रहे हैं तब वह निश्चित नहीं है उनको भरोसा नहीं होता है तब वह किसी भी समय अपने स्टॉक को अचानक से बेच देते हैं इस वजह से मार्केट में गिरावट शुरू हो जाती है तब ऐसे समय बाजार को Volality में मापा जाता है और यह बोला जाता है कि मार्केट बहुत ही ज्यादा Volatile हो गया है.

जबकि लिक्विडिटी किसी भी स्टॉक का Bid प्राइस और Ask price के बीच का अंतर बताने में मदद करता है.

लेकिन अगर अगर मार्केट में लिक्विडिटी कम हो जाएगी तब मार्केट बहुत ही ज्यादा Volatile हो सकता है.

volatile stocks for swing trading|swing trading k lie volatile stocks

स्विंग ट्रेडिंग एक ऐसी ट्रेडिंग है जिसमें stock का मोमेंटम हमेशा बना होता है. स्विंग ट्रेडिंग के लिए हमें ऐसे स्टॉक ढूंढने चाहिए जो कि अपने हाई से काफी ज्यादा गिर चुके हैं और उनके फिर से उठने के चांस बाकी है.

ऐसे स्टॉक ढूंढने के लिए आप कुछ टेक्निकल इंडिकेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे कि सपोर्ट और रेजिस्टेंस कैसे ढूंढा जाता है सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस क्या है आप इसके बारे में यहां पर पढ़ सकते हैं.

आप आर.एस.आई RSI और एमएससीडी इंडिकेटर MACD लगा कर के भी इसके बारे में स्विंग ट्रेडिंग के स्टॉक को ढूंढ सकते हैं.

अगर स्टॉक अपने करंट मार्केट प्राइस से अंडरवैल्यू है और मार्केट की कंडीशन और मार्केट के पैरामीटर्स सब एकदम सही हैं तब आप ऐसे स्टॉक पर दांव खेल सकते हैं क्योंकि ऐसे स्टॉक पर दांव खेलना सही दांव खेलना माना इसलिए जाएगा क्योंकि यहां पर स्टॉक दोबारा से ऊपर की तरफ रिवर्ट्स करेगा.

स्विंग ट्रेडिंग के लिए स्टॉक कहां से ढूंढे| swing trading k liye high volatile stocks

इस तरह के स्टॉक ढूंढने के लिए आप कंपनी की न्यूज़ के बारे में पढ़ें ऐसे न्यूज़ आर्टिकल को अपने मोबाइल अलर्ट में लगा करके रखें ताकि जब भी इस तरह की न्यूज़ आए तब आपको पता लग जाए कि किस कंपनी में क्या हो रहा है.

और इस तरह के इंडिकेटर आप इस्तेमाल करें और ऐसे स्टॉक्स अपनी वॉच लिस्ट में हमेशा लगाकर रखें जो कि अपने हाई प्राइस से थोड़ा मार्केट में नीचे की तरफ ट्रेड हो रहे हैं तो ऐसे स्टॉक को हम अंडरवैल्यूड स्टॉक बोलते हैं.

वोलेटाइल स्टॉक्स फॉर ऑप्शन ट्रेडिंग.

ऐसे स्टॉक्स में आप इन्वेस्ट भी कर सकते हैं क्योंकि ऐसे स्टॉक्स में रिवर्स आने का पूरा मौका होता है और ऐसे स्टॉक्स आप इस तरह से ढूंढ सकते हैं जो कि Nifty 50, स्टॉक है और stocks all time high बना करके थोड़ा नीचे की तरफ गिर चुके हो. स्टॉक का नेचर Highly volatile होना चाहिए.

स्टॉक आप ऐसे कोशिश करिए कि ऐसा स्टॉक हमेशा Blue chip catagory के अंतर्गत आता हो ,क्योंकि ऐसे स्टॉक्स में अगर आप पैसा डालेंगे आपका पैसा ना फंसे और आपका पैसा वहां से निकलने की पूरी गुंजाइश हो इसलिए ऐसे स्टॉक्स ब्लू चिप स्टॉक्स की कैटेगरी में आने चाहिए.

How to find liquid stocks for intraday and option

लिक्विड स्टॉक्स की पहचान करना एक प्रोफेशनल ट्रेडर के लिए जरूरी हो जाता है. इसके लिए कुछ पॉइंट आपको अपने दिमाग में रखनी चाहिए

what is the difference between the bid price and ask price for liquid stocks?

जब स्टॉक्स खरीदा जाता है तो उसमें bid लगाई जाती है उसका एक प्राइस होता है जिसे बिड प्राइस बोला जाता है और उसी तरह से एक प्राइस और होता है ask price अगर इन दोनों प्राइस का डिफरेंस काफी कम होता है और इनके बीच का अंतर काफी कम होता है तब हमें यह पता लग जाता है कि इस स्टॉक में खरीदने वाले buyers काफी ज्यादा है और स्टॉक्स में लिक्विडिटी आ गई है

stock trading volume is high

स्टॉक ट्रेडिंग वॉल्यूम बहुत ज्यादा है यानी स्टॉक्स में बहुत ही ज्यादा खरीदी और बिकवाली हो रही है तब भी यह समझ में आता है कि स्टॉक्स में लिक्विडिटी है

ज्यादा ट्रेडिंग वाली एक अच्छी निशानी है और इसको पॉजिटिविटी से देख सकते हैं और यह अंदाजा लगा सकते हैं कि आने वाले समय में इसमें buyers काफी ज्यादा एक्टिव होने वाले हैं

High trading volume float price stocks

float इस प्रकार के शेयर होते हैं जो मार्केट में पूरी तरीके से उपलब्ध होते हैं ट्रेडिंग करने के लिए और यह पब्लिक ट्रेडिंग में उपलब्ध किए जाते हैं यानी ओपन मार्केट में ट्रेड किए जाते हैं अगर ट्रेडिंग float high है तब इससे स्टॉक्स में लिक्विडिटी आ सकती है

शेयर मार्केट में ऐसे कौन से शेयर हैं जो बहुत ज्यादा ऊपर – नीचे होते हैं?

आप ऐसे स्टॉक्स गूगल करके देख सकते हैं क्योंकि मैं यहां पर किसी भी स्टॉक का नाम लेना ठीक नहीं समझता हूं क्योंकि मैं यहां किसी भी तरह की एडवाइज या फिर टिप्स प्रोवाइड नहीं करता हूं इसलिए मैं यहां पर किसी स्टॉक का नाम नहीं ले रहा हूं.

शेयर बाजार में पैसा लगाते वक्त ध्यान रखें ये बातें, मुनाफा होने का चांस हो जाएगा डबल

शेयर बाजार में पैसा लगाते वक्त ध्यान रखें ये बातें, मुनाफा होने का चांस हो जाएगा डबल

शेयर बाजार में निवेश करते वक्त कंपनी का चुनाव और पैसे लगाने का समय बहुत अहम होता है. इसके अलावा भी कई चीजें होती हैं, जिनसे तय होता है कि आपको फायदा होगा या नुकसान.

कोरोना काल के दौरान बहुत सारे लोगों ने अपने डीमैट अकाउंट खुलवाए और शेयर बाजार (Investing in Share Market) में पैसे लगाए. कुछ ने फायदा भी कमाया और कुछ को तगड़ा नुकसान भी हुआ. शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान किसे फायदा होगा और किसे नुकसान, यह बहुत हद तक आपके चुनाव और आपके फैसलों पर निर्भर करता है. अगर आप शेयर बाजार से तगड़ी कमाई करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको कुछ बातों को ध्यान में रखना होगा.

1- शेयरों का चुनाव सबसे अहम

शेयर बाजार में निवेश करने में सबसे अहम होता है शेयरों का चुनाव. आपको जिस भी कंपनी का शेयर क्या आपके लिए स्विंग ट्रेडिंग सही है? खरीदना है सबसे पहले उसके बारे में पूरी एनालिसिस करें. देखें कि कंपनी का बिजनस क्या है और कैसा चल रहा है. चेक करें कि कंपनी को फायदा हो रहा है या नुकसान. ये भी देखें कि कंपनी भविष्य को लेकर क्या प्लान बना रही है. इतना ही नहीं, कंपनी के मैनेजमेंट के बारे में भी जरूर स्टडी करें, क्योंकि अगर मैनेजमेंट में ही गड़बड़ होगी तो तगड़ा मुनाफा देने वाली कंपनी भी भारी नुकसान का सबब बन सकती है.

2- सही समय पर करें निवेश

वैसे तो शेयर बाजार में निवेश करने का सही समय क्या है, ये कोई नहीं बता सकता, लेकिन आपको इसका अनुमान लगाना होगा. इसके लिए आपको खबरों को अच्छे से पढ़ना होगा, ताकि इस बात का अंदाजा लगाया जा सके कि शेयर बाजार में तेजी कब से शुरू हो सकती है या ये पता चल सके कि कब तक बाजार गिरेगा. कोरोना काल में जब बाजार गिरने लगा तो बहुत सारे लोगों ने पैसे निकालने शुरू कर दिए. वहीं जो लोग बाजार और खबरों को अच्छे से ट्रैक कर रहे थे, उन्होंने निचले स्तरों पर पैसा लगाया और चंद महीनों में ही दोगुना-तिगुना मुनाफा कमाया. उस सही समय को अगर आप पहचान लेते हैं तो आपको भी तगड़ा मुनाफा हो सकता है.

3- निवेश पर करें फोकस, ट्रेडिंग पर नहीं

शेयर बाजार में पैसा लगाने का मतलब अधिकतर लोग ये समझते हैं कि हर रोज सुबह से शाम तक शेयर बाजार ही देखते रहें. उन्हें लगता है कि जैसै ही दाम बढ़ेंगे, शेयर बेचकर मुनाफा कमा लेंगे. कई लोग एक ही दिन में शेयर खरीद कर बेच देते हैं, जिसे इंट्रा डे ट्रेडिंग कहा जाता है. वहीं कुछ लोग कुछ दिनों, हफ्तों या महीनों में मुनाफा काट लेते हैं, जिसे स्विंग ट्रेडिंग कहते हैं. वहीं सबसे तगड़ा मुनाफा मिलता है निवेश से, जो लंबे वक्त के लिए किया जाता है. राकेश झुनझुनवाला से लेकर वॉरेन बफे तक सभी निवेश की सलाह देते हैं. कभी-कभी ट्रेडिंग बुरी बात नहीं, लेकिन अधिकतर समय निवेश के बारे में सोचना चाहिए.

4- एक ही शेयर पर ना लगाएं सारे पैसे

शेयर बाजार में वह लोग अक्सर मुंह की खाते हैं, जो अपना सारा पैसा एक ही शेयर में झोंक देते हैं. शेयर बाजार में पैसा लगाते वक्त सारा पैसा एक ही शेयर में नहीं लगाना चाहिए, बल्कि एक पोर्टफोलियो बनाना चाहिए. अगर आप एक ही शेयर में पैसे लगाएंगे और उसमें नुकसान होता है तो आपके सारे पैसे डूब सकते हैं. वहीं अगर आपने एक पोर्टफोलियो बनाया होगा और आप कई शेयरों में थोड़ा-थोड़ा पैसा लगाते हैं तो एक के नुकसान की भरपाई दूसरे शेयर से हो जाएगी.

5- टिप्स के चक्कर में कभी ना फंसें

शेयर बाजार में जो निवेश की शुरुआत करता है, वह शुरू-शुरू में कुछ लोगों से ये जरूर पूछता है कि किस शेयर में पैसे लगाने चाहिए. अगर आपने भी ऐसा कुछ किया है या करने की सोच रहे हैं तो ये ख्याल अपने मन से अभी निकाल दीजिए. तमाम दिग्गज निवेशकों की भी हमेशा यही सलाह रहती है कि टिप्स के चक्कर में ना पड़ें. ना ही झुनझुनवाला या बफे जैसे निवेशकों के पैटर्न को फॉलो करें. अगर कुछ गड़बड़ दिखती है तो वो तो अपना पैसा मार्केट से निकाल लेंगे, लेकिन आप फंसे रह जाएंगे. कभी भी टिप्स के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए, बल्कि कंपनी के बारे में पूरी रिसर्च करने के बाद ही उसमें पैसे लगाने चाहिए.

6- ग्लोबल न्यूज को ट्रैक करें, मार्केट सेंटिमेंट का ध्यान रखें

शेयर बाजार में निवेश करते वक्त ग्लोबल न्यूज पर विशेष ध्यान रखें, खासकर अमेरिकन मार्केट पर. अगर विदेशी बाजार में उथल-पुथल होती है, तो उसका भारतीय शेयर बाजार पर असर दिखता ही है. जैसे ग्लोबल मंदी या अमेरिका में मंदी आने का असर भारत पर दिखता है. अगर फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं, तो उसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता ही है. ऐसे में आपको ग्लोबल न्यूज और मार्केट सेंटिमेंट को ध्यान में रखते हुए ही शेयर बाजार में पैसे लगाने चाहिए.

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शेयर बाजार में स्टॉक कैसे चुनें? (How to pick Stocks in Share Market?)

शेयर मार्किट (Share Market) में आप किन शेयरों का व्यापार करते हैं, यह आपके अनुभव के स्तर, आपके पास कितनी पूंजी उपलब्ध है, और आप किस प्रकार की ट्रेडिंग कर रहे हैं, सहित कई मुद्दों पर निर्भर करते हैं। चाहे आप दिन के कारोबार के लिए सबसे अच्छा स्टॉक खोजने (Pick Stocks) की कोशिश कर रहे हों, या आप स्विंग ट्रेडिंग (Swing Trading) , पोजीशन ट्रेडिंग (Position Trading ) या निवेश (Investment) जैसी अन्य शैलियों को पसंद करते हैं ।

स्टॉक चुनने के लिए आपके मानदंड को ट्रेडिंग प्लान (Trading Plan)

के हिस्से के रूप में लिखा जाना चाहिए (अधिक के लिए जोखिम प्रबंधन देखें) एक योजना विकसित करने पर विवरण)। आपकी ट्रेडिंग योजना गतिशील है, और इस प्रकार, जैसे-जैसे आप सीखना, कौशल विकसित करना और अपनी ताकत और कमजोरियों को उजागर करना जारी रखेंगे, यह विकसित होगा।

स्टॉक चुनने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए

• अपने जोखिम के स्तर को समझें और तय करें कि क्या उचित है।
• आपके व्यक्तित्व प्रकार से कोई फर्क नहीं पड़ता, निवेश करने के लिए स्टॉक चुनने के लिए एक रणनीति विकसित करें।
• एक स्टॉक चुनकर (Pick Stocks) शुरू करें और फिर परिणामों का विश्लेषण करें।
• स्टॉक की हलचल और संपूर्ण बाजार को समझने के लिए ट्रेडिंग चार्ट का उपयोग करें।
• अंत में, अपनी योजना पर कायम रहें!

अपने व्यक्तित्व के आधार पर स्टॉक चुनो (Pick Stocks Based on Your Personality)

साथ ही, आपका व्यक्तित्व प्रकार आपके द्वारा ट्रेड किए जाने वाले स्टॉक के प्रकारों में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा। उदाहरण के लिए, यदि आप २३ वर्ष के हैं, वीडियो गेम में पले-बढ़े हैं, आपका दिमाग तेज़ है और ध्यान केंद्रित रहने के लिए आपको बहुत अधिक कार्रवाई करने की आवश्यकता है, तो आपके लिए अल्पकालिक, स्केलिंग सही हो सकती है। दूसरी ओर, यदि आप 65 वर्ष के हैं, तो निर्णय लेने से पहले चीजों के बारे में सोचना पसंद करते हैं, तो हो सकता है कि स्विंग ट्रेडिंग (Swing Trading) कम अस्थिरता वाले स्टॉक अधिक उपयुक्त हों।

आप जो भी निर्णय लें, उस पर विचार अवश्य करें। आपको यह समझने की जरूरत है कि शेयरों में उतार-चढ़ाव के विभिन्न स्तर होते हैं और कीमतों में उतार-चढ़ाव का वेग होता है। अपनी जानकारीके लिए इंडिकेटर जैसे टूल का उपयोग करके, आपको यह देखने में सक्षम होना चाहिए कि कौन शेयर खरगोश है और कौन सा शेयर कछुआ।

स्टॉक चुनते समय जोखिम प्रबंधन को ध्यान में रखें ( Keep Risk Management in Mind When Picking Stocks)

निर्धारित करें कि आप किस हद तक जोखिम के साथ रह सकते हैं और बर्दाश्त कर सकते हैं। स्टॉक चुनने (Pick Stocks) की रणनीति बनाने पर ध्यान दें जो पूंजी को संरक्षित करने और क्या आपके लिए स्विंग ट्रेडिंग सही है? जोखिम को नियंत्रित करने के लिए डिज़ाइन की गई है। सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य पूंजी को संरक्षित करना होना चाहिए। आपको यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि खेल में बने रहने के लिए अपनी पूंजी को संभालना बहोत ही महत्वपूर्ण है ।

व्यापार करने के लिए स्टॉक का एक पूरा स्पेक्ट्रम है, प्रत्येक में विभिन्न स्तरों की अस्थिरता, मूल्य और मात्रा विशेषताओं के साथ। जोखिम कम करके शुरुआत करें। जैसे-जैसे आपके कौशल, अनुभव और आपकी सफलता में वृद्धि होती है, आप उन शेयरों से जुड़े जोखिम को बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं जिन्हें आप व्यापार के लिए चुनते हैं।

नए व्यापारियों द्वारा की जा सकने वाली सबसे खराब गलतियों में से एक है “बस व्यापार शुरू करें” और “देखें कि यह कैसा चल रहा है।” आपको सूचित और शिक्षित व्यापारिक निर्णय लेने, विश्लेषण और गणना करने की आवश्यकता है। जैसे कोई व्यवसाय शुरू करने या बढाने के लिए एक पूर्व योजना आवश्यक है।

जब आप निवेश करने के लिए स्टॉक चुनते हैं तो इसे सरल रखें ( Keep it Simple When You pick Stocks to Invest In)

अपनी स्टॉक चुनने की प्रक्रिया (Picking Stocks Process) को सरल रखें! लंबी अवधि में आप जो भी स्टॉक चुनने की रणनीति तय करते हैं, केवल एक स्टॉक का व्यापार करके शुरू करें, देखें, अध्ययन करें और सीखें । प्रत्येक स्टॉक का अपना व्यक्तित्व और विशेषताएं होती हैं। आदर्श चाल चलने का अनुमान लगाने के लिए आपको इन “आदतों” को समझने की जरूरत है। चार्ट का अध्ययन कई समय सीमा में करें – इंट्राडे, दैनिक और साप्ताहिक। समय के साथ, एक और स्टॉक जोड़ना शुरू करें, और फिर दूसरा, इत्यादि। जब आप एक स्टॉक का व्यापार कर रहे हों, तो कुछ अन्य शेयरों के व्यवहार का अध्ययन करना और उनके व्यवहार को सीखना ठीक है।

एक बार जब आप “लर्निंग कर्व” के साथ आगे बढ़ जाते हैं, तो आप जिन अन्य शेयरों का अध्ययन कर रहे हैं, उनमें से एक का व्यापार करना शुरू करें। जब से आप इसे देख रहे हैं, तब से आपको इसके व्यवहार की समझ पहले से ही होगी। उन शेयरों पर ध्यान दें जो आपकी ट्रेडिंग योजना के साथ संरेखित हों और निरंतरता की अनुमति दें।

ट्रेडिंग दिवस के दौरान अपना मानदंड न बदलें – केवल तभी जब बाजार बंद हो। अपनी योजना के साथ रहो। व्यापार के बीच में एक योजना बदलने से आप अपनी योजना पर मानसिक रूप से “धोखा” धोका देने जैसे होगा । इससे अनुशासन का सामान्य विघटन होता है।

कुछ वास्तविक जीवन के उदाहरण नीचे सूचीबद्ध हैं:

• खुदपे विश्वास होने तक एक बार में केवल 5 स्टॉक चुनने चाहिए और १ ही शेयर में व्यापार करना चाहिए।
• शेयर की कीमत ₹ 150 और ₹ 250 के बिच की होनी चाहिए ।
• शेयर्स की अस्थिरता की मध्यम डिग्री होनी चाहिए ।
• कोई बायोटेक स्टॉक नहीं (उच्च इंट्राडे अस्थिरता) ।
• हर रात अपने ५ शेयरों का कई समय सीमा में अध्ययन करना जरुरी है ।

स्टॉक्स स्विंग ट्रेडिंग चुनने के तरीके (2 दिन से 3 सप्ताह तक)

• व्यापार करने के लिए 50 स्टॉक चुने – १ एक बार में अच्छी समझ के साथ इसमें बहुत शोध हो सकता है।
• शेयर कीमत ₹ २०० से ऊपर के ऊपर हो ।
• एक दिन में ३० शेयर चुने जिनका वॉल्यूम ५,००,००० से ऊपर हो ।

२५ लंबी घड़ी सूची के लिए ( 25 for Long watch list)

  • मौलिक रूप से मजबूत (Strong fundamentally ) – (प्रमुख क्षेत्रों में बढ़ती राजस्व और कमाई, उच्च सापेक्ष ताकत, )
  • 200 मूविंग एवरेज के ऊपर ( Above 200 moving average)
  • जो निफ़्टी ५० (Nifty 50) फ्यूचर्स का अनुसरण कर रहे हो।

25 लघु घड़ी सूची के लिए ( 25 for Short watch list)

  • मौलिक रूप से कमजोर (कमजोर क्षेत्रों में राजस्व और कमाई में गिरावट, कम सापेक्ष ताकत)
  • 200 मूविंग एवरेज से नीचे ( Below 200 moving average)
  • जो निफ़्टी ५० फ्यूचर्स का अनुसरण कर रहे हो।

जरुरी संपर्क (LINKS) इन शेयर मार्किट – NSE & BSE INDIA : IMPORTANT LINKS

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52 वीक ब्रेकआउट स्ट्रैटेजीज

दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ सालों में बोहत सारे एकैडमिक रिसर्च हुए हैं और इनमें से अधिकतर, इशारा करते हैं 52 हफ्तों के हाई तक पहुंचनेवाले स्टॉक्स के हाई मोमेंटम की ओर। यह मोमेंटम इन्वेस्टिंग के सबसे प्रसिद्ध पेपर के इस कोट से समझी जा क्या आपके लिए स्विंग ट्रेडिंग सही है? सकती है।

The 52-week high price explains a large portion of the profits from momentum investing.

We find that nearness to the 52-week high is a better predictor of future returns than are past returns”
---- The 52-Week High and Momentum Investing - Thomas George and Chuan Hwang, Journal of Finance, 2004.

रिसर्च और डेटा के बावजूद, मैंने ऑब्जर्व किया है कि इन सालाना हाई और लो जोंस में ट्रेडिंग करनेवाले ट्रेडर्स पैसा गंवा देते हैं। कारण क्या है?

इन्टरनेट ट्रेडिंग के आने से पहले 52 वीक हाई और लो वास्तविक होते थे और मार्केट ज़्यादा मोमेंटम के साथ उनके आगे बढ़ता था। लेकिनजैसे-जैसे समय के साथ, और ज़्यादा लोग इस सरल मेथड को अपनाने लगे और इन्फर्मेशन की स्पीड बढ़ी जिसके परिणामस्वरूप अस्थिरता और झूठे ब्रेक आउट्स बढ़े और इसकी ट्रेडिंग की तेज़ी खत्म हो गई।

तो फिर, आज के ट्रेडिंग के माहौल में इन स्टॉक्स की ट्रेडिंग कैसे की जानी चाहिए?

मेथड
यहाँ एक स्टेप बाय स्टेप मेथड दिया जा रहा है जिसे फॉलो करके आप ट्रेड कर सकते हैं।

  1. 52 वीक के हाई और लो को नियमित स्कैन करें।

मार्केट पल्स एप में ऐसे कई प्री-डिफ़ाइंड स्क़ैन्स हैं जो आपके लिए यह कर सकते हैं। इनके नाम हैं-

2. हाइज़ और लोज़ तक पहुंचनेवाले स्टॉक्स की अलग-अलग वॉचलिस्ट बनाएँ।

3. स्टॉक के इन लेवल्स को हिट करने के बाद रेंज से पलबैक होने का इंतज़ार करें। 100, 1000 आदि जैसे राउंड फिगर्स को देखें। ये बहुत महत्वपूर्ण होते हैं और ऐसी मूव्ज़ के दौरान मजबूत रेजीस्तेंस बनते हैं।

4. पिछले स्विंग के हाइज़ और लोज़ के आसपास कंसॉलिडेशन ढूंढें। इसे मॉनिटर करने के लिए आप स्टॉक के सपोर्ट और रेजिस्टेंस ज़ोन का उपयोग कर सकते हैं। एक गहरे करेक़्शन और यह देखने के लिए कि इन लेवल्स पर यह स्टॉक कैसे व्यवहार करते हैं, मैं 20-डे ईएमए या 50-डे ईएमए जैसे डायनामिक सपोर्ट/रेजिस्टेंस ज़ोन का उपयोग करना पसंद करता हूँ। इस कंसॉलिडेशन फेज में 2 से 5 हफ्ते लग सकते हैं।

5. हाल के स्विंग के नीचे एक टाइट स्टॉप लॉस साथ जब बड़े ट्रेंड्स ठहरने लगते हैं तब लॉन्ग पोज़िशन एंटर करें। इनमे से अधिकांश ब्रेक आउता ट्रेडिंग के पहले घंटे में होते हैं तो इस समय चऔकन्ने रहें।

6. अगले 2-3 ट्रेडिंग सेशन्स में यदि स्टॉक 52 वीक हाई के ऊपर ब्रेक आउट करता है तो मोमेंटम आपकी ओर होगा और लाभ तेज़ी से आएगा।यदि नहीं, तो अपने स्टॉप लॉस को ट्रेल करें और अगर आपके स्टॉक्स हिट करें तो एग्जिट कर जाएँ।अनुभवी ट्रेडर्स ब्रेक आउट पर अपनी मौजूदा पोज़िशन्स में जोड़ने पर विचार कर सकते हैं। लेकिन यदि आप अभी शुरुआत कर रहे हैं तो मैं आपको यह करने की सलाह नहीं दूँगा।

7. अधिकांश ट्रेडर्स केवल 52 वीक हाई पर फोकस करते हैं। मेरा सुझाव है कि आप जितना अप साइड ट्रेड करते हैं आपको उतना ही डाउन ट्रेड (52 वीक लो) करना चाहिए। सामान्यतः डाउन साइड में मोमेंटम अपसाइड से ज़्यादा तेज़ होता है।

8. उन स्टॉक्स को चुनिए जिनमें पर्याप्त मात्रा में अच्छे वॉल्यूम्स और अच्छी परिवर्तनशीलता रहती है। अद्रव स्टॉक्स को ट्रेड करना हमेशा जोखिम भरा होता है। मैं खुद को निफ्टी 200 और लिक्विड फ्यूचर्स काउंटर तक सीमित करना पसंद करता हूँ।

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केस स्टडीज़
फिगर अबोट इंडिया का चार्ट दिखाता है

जैसा कि आप चार्ट में देख सकते हैं स्टॉक ने 26 जून 2019 को अपने पिछले 52 हफ्ते के 8820 के हाई को तोड़ा। 9000 के हाई को हिट करने के बाद स्टॉक जल्दी से वापस लौटना शुरू कर देता है। इसे 20ईएमए पर पहला सपोर्ट मिलता है और एक नए हाई तक पहुँचने के अपने कुछ हफ्तों के असफल अटेम्प्ट के बाद, कुछ हफ्तों के लिए कंसॉलिडेट हो जाता है। यह 50 ईएमए के पास बढ़ी हुई वॉल्यूम के साथ एक नए हाई के लिए प्रयास करता है। 6 अगस्त 2019 की हाई वॉल्यूम कैन्डल एक 52 वीक ट्रेडर के लिए8439 पर 8278 के स्टॉप लॉस के साथ लॉन्ग एंट्री के लिए एक परफेक्ट एंट्री पॉइंट होता।

नीचे दिया गया फिगर हीरो मोटों को दिखाता है।

यह केस 52 वीक लो के टूटने को दिखाता है। 23 जुलाई 2018 को लो टूटा इसके बाद पहले 20 ईएमए पर पुल बैक करता है और फिर 50ईएमए(2) पर जहां से बड़ी वॉल्यूम के साथ बड़ा ट्रेंड मान लिया जाता है। 11 सितंबर 2018 को 3184 पर 3345 के स्टॉप लॉस के साथ एक शॉर्ट शुरू किया जा सकता था।

कंक्लूजन

आपको यह ज़रूर जान लेना चाहिए कि यह मेथड बहुत फायदेमंद हो सकता है लेकिन इससे सबसे अच्छे परिणाम पाने के लिए कभी कई डीनो तक तो कभी कई हफ्तों तक उच्च स्तर के सुधार की आवश्यकता होगी। आपको अपनी मौजूदा वॉचलिस्टको रोज़ रिव्यू और अपडेट करना होगा। ऐसे स्टॉक होंगे जो आपके क्राइटेरिया में नहीं आएंगे और आपको बिना पछतावे के उन ट्रेडोन को पास करने के लिए तैयार होना चाहिए।

Note: This article is for educational purposes only. Kindly learn from it and build your knowledge. We do not advice or provide tips. We highly recommend to always trade using stop loss.

Arshad Fahoum

Arshad Fahoum

Arshad is an Options and Technical Strategy trader and is currently working with Market Pulse as a Product strategist. He is authoring this blog to help traders learn to earn.

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