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खरीदारी की मुद्रा

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Dubai Airport Duty free

आरबीआई मई में अमेरिकी मुद्रा का शुद्ध खरीदार बना रहा

जुलाई 2022 के लिए आरबीआई बुलेटिन में दिए आंकड़ों से यह जानकारी मिली। शनिवार को जारी इस बुलेटिन के अनुसार आरबीआई ने मई में हाजिर बाजार से 10.143 अरब अमेरिकी डॉलर की खरीदारी की और 8.142 अरब अमेरिकी डॉलर की बिक्री की।

इससे पहले अप्रैल 2022 खरीदारी की मुद्रा में केंद्रीय बैंक ने 1.965 अरब अमेरिकी डॉलर की शुद्ध खरीदारी की थी।

15 माह के निचले स्तर पर विदेशी मुद्रा भंडार, आठ अरब डॉलर की आई गिरावट

विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट का कारण विदेशी मुद्रा आस्तियों का घटना है जो कुल मुद्रा भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा गोल्ड रिजर्व भंडार घटने से भी विदेशीमुद्रा भंडार कम हुआ है।

15 माह के निचले स्तर पर विदेशी मुद्रा भंडार, आठ अरब डॉलर की आई गिरावट

देश का विदेशी मुद्रा भंडार आठ जुलाई को समाप्त सप्ताह में 8.062 अरब डॉलर घटकर 580.252 अरब डॉलर रह गया। इसी के साथ विदेशी मुद्रा भंडार 15 माह के निचले स्तर पर आ गया है। वहीं, एक अप्रैल को समाप्त हफ्ते के बाद से खरीदारी की मुद्रा यह सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। इस हफ्ते में 11.17 अरब डॉलर की गिरावट आई थी।

वजह क्या है: आठ जुलाई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट का कारण विदेशी मुद्रा आस्तियों का घटना है जो कुल मुद्रा भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा गोल्ड रिजर्व भंडार घटने से भी विदेशीमुद्रा भंडार कम हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक इस सप्ताह में गोल्ड रिजर्व का मूल्य भी 1.236 अरब डॉलर घटकर 39.186 अरब डॉलर रह गया।

रिजर्व बैंक के शुक्रवार को जारी किये गये भारत के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा आस्तियां (एफसीए) 6.656 अरब डॉलर घटकर 518.089 अरब डॉलर रह गई। डॉलर में अभिव्यक्त विदेशी मुद्रा भंडार में रखे जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियों में यूरो, पौंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं में मूल्यवृद्धि अथवा मूल्यह्रास के प्रभावों को शामिल किया जाता है।

समीक्षाधीन सप्ताह में, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास जमा विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 12.2 करोड़ डॉलर घटकर 18.012 अरब डॉलर रह गया। आईएमएफ में रखे देश का मुद्रा भंडार भी 4.9 करोड़ डॉलर घटकर 4.966 अरब डॉलर रह गया।

Rupee Power : अब यूएई में चलेगा रुपया, दुबई एयरपोर्ट पर भारतीय करेंसी में कर सकेंगे खरीदारी

आमतौर पर विदेश जाने पर हमें भारतीय मुद्रा को उस देश की स्थानीय करेंसी या फिर डॉलर से बदलना होता है। लेकिन दुबई जाने पर आप वहां के एयरपोर्ट पर भारतीय मुद्रा में ही खरीदारी कर सकते हैं।

Edited by: IndiaTV Hindi Desk
Published on: July 04, 2019 7:40 IST

Dubai Airport Duty free- India TV Hindi

Dubai Airport Duty free

आमतौर पर विदेश जाने पर हमें भारतीय मुद्रा को उस देश की स्‍थानीय करेंसी या फिर डॉलर से बदलना होता है। लेकिन दुबई जाने पर आप वहां के एयरपोर्ट पर भारतीय मुद्रा में ही खरीदारी कर सकते हैं। जी हां, आपको दुबई एयरपोर्ट पर मौजूद ड्यूटी फ्री दुकानों से खरीदारी करने के लिए आपको करेंसी एक्‍सचेंज की जरूरत नहीं होगी। आप भारतीय रुपए में ही पेमेंट कर सकते हैं।

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संयुक्‍त अरब अमीरात के एक अखबार गल्‍फ न्‍यूज की रिपोर्ट के अनुसार इससे भारतीय यात्रियों को काफी फायदा होगा। अभी तक यात्रियों को करेंसी का एक बड़ा हिस्‍सा एक्‍सचेंज के दौरान गंवा देना पड़ता था। लेकिन अब वे भारतीय करेंसी में ही पेमेंट कर सकेंगे।

गल्‍फ न्‍यूज के खरीदारी की मुद्रा मुताबिक भारतीय करेंसी अब दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के तीनों टर्मिनल और अल मकतूम एयरपोर्ट पर स्‍वीकार की जाएगी। अखबार को एक ड्यूटी फ्री शॉप के दुकानदार ने बताया कि हमने भारतीय रुपए में पेमेंट लेनी शुरू कर दी है।

बता दें कि हर साल करीब 9 करोड़ लोग दुबई खरीदारी की मुद्रा के एयरपोर्ट आते हैं। इसमें से करीब 1.2 करोड़ भारतीय होते हैं। बता दें कि दु‍बई में ड्यूटी फ्री दुकानों से खरीदारी करने के लिए भारतीय यात्रियों को डॉलर, दिरहम या फिर यूरो में मुद्र को परिवर्तित करना पड़ता था।

बता दें कि दुबई एयरपोर्ट पर 1983 से लेकर अब तक 15 विदेशी करेंसियों को ड्यूटी फ्री शॉप से खरीदारी के लिए मान्‍यता प्रदान की गई है।

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कॉपर करेंसी से खुले काशी-मथुरा के 2100 साल पुराने संबंध: विदेशी राजा करते थे बनारस से खरीदारी; ताम्र मुद्रा पर अंकित हैं लक्ष्मी, वृक्ष और घोड़े के चित्र

वाराणसी के ओढ़े गांव में मिला 2100 साल प्राचीन तांबे का सिक्का। - Dainik Bhaskar

वाराणसी में मिला एक कॉपर करेंसी मथुरा और काशी के ऐतिहासिक रिश्तों की ओर इशारा करता है। भारत में (तक्षशिला के बाद) शक राजवंश की स्थापना करने वाले राजा हगामष और हगान का व्यापारिक कामकाज काशी में ही होता था। इन दोनों ने वहीं, देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी को प्राचीन काल में एक बड़ा बाजार बनाया था। वाराणसी के औढ़े गांव में एक खुदाई के दौरान मिले कॉपर क्वाइन का भार 4.07 ग्राम, मोटाई 2.17 मिलीमीटर और लंबाई 19.64 मिलीमीटर है।

शक राजा वाराणसी से किस तरह के सामान खरीदते थे, इसका पता तो अभी तक नहीं चला है, मगर यह पुष्ट हो रहा है कि इनका काशी के साथ अच्छे खासे आर्थिक संबंध थे।

सिक्कों पर स्टडी कर रहे हैं BHU के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनोद जायसवाल।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में इन सिक्कों पर स्टडी चल रही है। BHU के लिपि विशेषज्ञों ने बताया है कि शक राजा हगान और हगामष ने इन सिक्कों पर ब्राह्मी लिपि में अपने नाम भी लिखवाए थे। वहीं सिक्कों पर मां लक्ष्मी, बदंब वृक्ष और सांप की कलाकृति और पीछे वाले हिस्से पर घोड़ा बना हुआ है। इसके अलावा इन राजाओं के बाद दूसरे भी सिक्के मिले हैं, जिन पर राजबुल और षोडास नामक राजाओं का उल्लेख मिलता है। बता दें कि यूनानियों के बाद भारत पर आक्रमण करने वाले दूसरे विदेशी राजवंश शक ही थे।

पहली बार मथुरा से बाहर मिले साक्ष्य
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में प्राचीन इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनोद जायसवाल को यह सिक्का एक छात्र से मिला। उन्होंने बताया कि पहली बार ऐसा हो रहा है कि मथुरा क्षेत्र के बाहर शक राजाओं हगान और हगामष के चलवाए सिक्के मिले हैं। इसका यही अर्थ होता है कि काशी और मथुरा के बीच संस्कृति और धर्म ही नहीं बल्कि इकोनॉमिक एक्सचेंज का भी मजबूत रिश्ता था।

मध्य-एशिया की कबीलाई जाति थी शक

डॉ. जायसवाल ने कहा कि शकों ने पहले तक्षशिला को अपना राज्य बनाया, फिर हगामष ने मथुरा को दूसरे राज्य के रूप में स्थापित किया। हगान और हगामष दोनों भाई थे। भारत में शक राजा अपने आप को 'क्षत्रप' कहते थे। शक मध्य एशिया की एक कबीलाई जाति थी। वहीं भारत पर आक्रमण करने वाले दूसरे विदेशी शासक थे।

चुनार मार्ग पर है यह गांव
यह गांव अदलपुरा-चुनार मार्ग पर पड़ता है। BHU के एक छात्र प्रदीप सैनी को यह सिक्का उनका घर बनवाने के दौरान नींव में मिला था। साथ ही कई अन्य पुरातात्विक सामान मिले। उसने इस बात की जानकारी डॉ. विनोद जायसवाल को दी। इसके बाद उन्होंने इस सिक्के पर एक महीने तक स्टडी की, जिसमें ऐसा रिजल्ट मिला है।

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